1. प्रस्तावना :-
(i)
राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद, राजस्थान संस्था रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1958 के अन्तर्गत एक पंजीकृत संस्था है, जो प्रदेश में युवा मामलें एवं खेल विभाग के नियन्त्रण में राज्य में खेलों के विकास की सर्वोच्च संस्था है। स्थापना के पश्चात क्रीड़ा परिषद ने विगत 58 वर्षों के इतिहास में राज्य के खेलों के विकास में अपनी महती भूमिका निभाई है।
(ii)
राज्य क्रीड़ा परिषद द्वारा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए खिलाड़ियों को ‘‘महाराणा प्रताप पुरस्कार‘‘ से सम्मानित किया जाता है। पुरस्कार में प्रशस्ति पत्र के साथ में सम्मान स्वरूप 10,000 रूपये की नकद राशि भी दी जाती रही है। अब तक राज्य के 122 खिलाड़ियों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। अब महाराणा प्रताप पुरस्कार की राषि 1,00,000/- रूपये नकद कर दी गई है।
(iii) क्रीड़ा परिषद ऐसे खेल प्रशिक्षकों को भी ’’वशिष्ठ पुरस्कार’’ से सम्मानित करती है। जो राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को तराश कर योग्य खिलाड़ी बनाते है अब तक 25 प्रशिक्षकों को ‘‘वशिष्ठ पुरस्कार‘‘ से सम्मानित किया जा चुका है। इस पुरस्कार की राषि को भी 1,00,000/- रूपये नकद कर दिया गया है।
(iv) भारत में खेलों के विकास को नई दिशा प्रदान करने के लिए राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद श्रेय की पात्र है। खेल परिषद ने देश में पहली बार राज्य के चयनित खिलाडियों हेतु आवासीय खेलकूद प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की परम्परा डाली, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहा व अनुकरण किया गया। परिषद ने पर्वतीय स्थल माउण्ट आबू में सन् 1959 में पहले खेलकूद प्रशिक्षण शिविर की शुरूआत की। मई-जून, 2015 में इस परम्परा को जारी रखते हुए 57वाँ केन्द्रीय प्रशिक्षण शिविर माउण्ट आबू व जयपुर में आयोजित किया गया।
(v) खेल परिषद द्वारा जनजाति क्षेत्रों की प्रतिभाओं को तलाश कर तराशने के लिए ग्रीष्मावकाश में पृथक से आवासीय प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। जनजाति शिविर वर्ष 2015 में भी माह मई-जून में उदयपुर में आयोजित किया गया।
2. क्रीड़ा परिषद का गठन :-
(i)
राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद के संरक्षक (PATRON) राज्य के राज्यपाल हैं। राज्य के मुख्यमंत्री भी परिषद के उप संरक्षक है। परिषद के अध्यक्ष मुख्य कार्यकारी होते हैं। इसके अलावा परिषद में उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष व राज्य सरकार द्वारा मनोनीत 12 से अनाधिक सदस्य होते हैं। 6 अधिकारी इसके पदेन सदस्य होते है। परिषद के प्रथम अध्यक्ष श्री वी.जी. कानेटकर थे। 11 जुलाई, 2014 से अध्यक्ष का कार्यभार श्री जे.सी. महांति (प्रमुख शासन-सचिव, युवा मामले एवं खेल विभाग) संभाले हुये हैं।
3. प्रशासनिक व्यवस्था :-
(i)
राज्य में खेल गतिविधियों के संचालन एवं प्रशासनिक कार्यों के निस्पादन के लिये विभिन्न संवर्ग के 341 पद सृजित हैं, जिसमें से 269 पद भरे हुए हैं व 72 पद खाली हैं। इसमें परिषद् के सचिव सहित, अधिकारी संवर्ग के 48, अधीनस्थ कर्मचारी संवर्ग के 165 पद एवं 54 मंत्रालयिक एवं 74 सहायक कर्मचारी के पद स्वीकृत हैं। प्रदेश में निःशुल्क खेल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये प्रशिक्षकों के 149 पद स्वीकृत हैं, जिसमें वर्तमान में 122 प्रशिक्षक प्रशिक्षण का कार्य कर रहे हैं। राज्य में भारतीय खेल प्राधिकरण (S.A.I.) के 3 प्रशिक्षक भी पदस्थापित हैं।
(ii) राज्य के सभी 33 जिलों में खेलों को बढ़ावा देने व नियमित प्रशिक्षण देने के लिए जिला खेलकूद प्रशिक्षण केन्द्र के कार्यालय कार्यरत हैं। इन कार्यालयों में परिषद का एक खेल अधिकारी/प्रभारी, कनिष्ठ लिपिक तथा जिलों में प्रचलित खेलों के आधार पर आवश्यकता एवं उपलब्धता अनुसार प्रशिक्षकों को पदस्थापित किया जाता हैं। कार्यालयों व मैदानों के रख-रखाव के लिए चैाकीदार एवं गेम्सबाॅय भी कार्यरत रहते हैं।
(iii) जिला खेल अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों एवं प्रशिक्षकों के सहयोग से विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताओं के आयोजन के साथ-साथ जिले के होनहार खिलाड़ियों को गहन प्रशिक्षण देने का कार्य भी करते हैं।